फिल्म इश्किया के गीत इब्नबतूता, बगल में जूता... पर विवाद अब भी जारी है। कहा जा रहा है कि यह गीत हिंदी के मशहूर कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता इब्नबतूता पहन के जूता से प्रेरित है। हालांकि इस गीत के बारे गुलजार साहब ने अब तक कुछ कहा नहीं है। उन्होंने इस गाने का क्रेडिट भी सर्वेश्वर दयाल सक्सेना को नहीं दिया है। अब सच्चाई क्या है, यह तो गुलजार साहब ही जानते हैं।
चलिए पहले एक नज़र डालते हैं इश्किया फिल्म के गाने पर,
इब्नबतूता,बगल में जूता
पहने तो करता है चुर्र
उड़ उड़ आवे
दाना चुग
उड़ उड़ आवे
दाना चुग
उड़ जावे चिडि़या फुर्र
ओह अगले मोड़ पे मौत खड़ी है
मरने की भी क्या जल्दी है
इब्नबतूता...
हॉर्न बजाके आ बगिया में
दुर्घटना से देर भली है
चल उड़ जा फुर फुर्र
दोनों तरफ से बजती है ये
आय हाय जिंदगी क्या ढोलक है
हॉर्न बजाके बगिया में
अरे थोड़ा आगे गतिरोधक है
अरे चल चल चल उड़ जा उड़ जा फुर फुर्र
इब्नबतूता...
अब जरा इस पर नज़र डालिए, यह सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचना है जिसे उन्होंने 1971 में लिखा था...
इब्नबतूता पहन के जूता
निकल पड़े तूफान में
थोड़ी हवा नाक में घुस गई
घुस गई थोड़ी कान में
कभी नाक को, कभी कान को
मलते इब्नबतूता
इसी बीच में निकल पड़ा
उनके पैरों का जूता
उड़ते उड़ते जूता उनका
जा पहुँचा जापान में
इब्नबतूता खड़े रह गये
मोची की दुकान में।
अब आप ही बताएं दोनों में कुछ समानता नज़र आती है। पहली नज़र में यह साफ है कि पहली दो लाइनों में बहुत हद तक समानता है। बचपन से ही मैं गुलजार साहब का फैन रहा हूं। उनकी फिल्म आंधी, मुसाफिर और माचिस मैंने कई बार देखी है। खास तौर पर आंधी तो मुझे काफी पसंद है। गुलजार साहब के लिखे गाने मुझे बहुत ही प्रिय लगते हैं। बचपन से ही उनके प्रति मेरे मन में काफी सम्मान है और मैं अब भी उनका काफी सम्मान करता हूं। पर मुझे लगता है कि इस मामले में गुलजार साहब देरी कर रहे हैं। उन्हें सामने आना चाहिए और लोगों को बताना चाहिए कि गाना लिखते समय उनके दिलो-दिमाग में क्या चल रहा था। हो सकता है कि कभी गुलजार साहब ने सर्वेश्वर जी की कविता की कुछ लाइनें देखी हों और अनजाने में ही गाना लिखते समय उनके दिमाग में उसी से मिलती जुलती लाइन आ गई हो। या गुलजार साहब ने सर्वेश्वर जी की कविता पढ़ी ही न हो और इश्किया का गीत उनके मस्तिष्क की ही उपज हो और इत्तेफाकन इस गीत की कुछ लाइनें उस कविता से प्रेरित लगने लगी हों। चाहें जो कुछ भी हो गुलजार साहब को इस मामले में आगे आना चाहिए और सच्चाई से लोगों को रूबरू कराना चाहिए।
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1 day ago




